यूरिन इंफेक्शन(UTI) : लक्षण, कारण, जाँच, इलाज

आज-कल के बदलते वातावरण में लोगों को तरह-तरह के संक्रमणों से जूझना पड़ रहा है। इन संक्रमणों में से जाना-माना संक्रमण है यूरिन इंफेक्शन यानि पेशाब में होने वाला संक्रमण। इसे UTI (urinary tract infection) भी कहा जाता है। UTI यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, आपकी मूत्र प्रणाली के किसी भी हिस्से में हो सकता है जैसे –किडनी, मूत्रवाहिनी (ureter), मूत्राशय (bladder) और मूत्रमार्ग (urethra)। ज्यादातर यह निचले अंगों – मूत्राशय और मूत्रमार्ग को अधिक प्रभावित करता है। UTI पुरुषों की बजाय महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है।

सामान्य तौर पर दो तरह का होता है UTI

ब्लैडर का संक्रमण-

ब्लैडर का संक्रमण आमतौर पर ई .कोली नाम के बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया आंतो और मल (Intestines and stool) में पाए जाते हैं। महिलाओं में उनकी शारिरिक बनावट अलग होने का कारण इसका खतरा ज्यादा होता है। इस संक्रमण के लक्षणों के अनुसार आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि, पेशाब करने की जरूरत है, लेकिन जब आप पेशाब करते हैं मात्रा बहुत कम होती है साथ ही पेशाब आने पर जलन और दर्द महसूस होता है। इसमें मरीज को कभी-कभी बुखार की भी शिकायत हो सकती है। इस तरह के संक्रमण को सामान्य तौर पर (lower uti) या (cystitis) कहते हैं और इसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है।

किडनी का संक्रमण (एक्यूट पाइलोनफ्राइटिस)-

यह UTI वह रूप होता है जिसमें इससे किडनी में संक्रमण फैल जाता है। साथ ही इसे UTI का सबसे गंभीर रूप भी कहा जाता है। अगर इसका समय पर योग्य इलाज नहीं कराया जाये तो यह संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है। इस तरह के संक्रमण को उच्च UTI (upper uti) भी कहा जाता है।इलाज न कराने पर यह गंभीर रूप ले सकता है इसका इलाज इंजेक्शन के माध्यम से किया जाता है।

क्या होते हैं यूरिन इंफेक्शन(UTI) के मुख्य लक्षण

  • पेशाब करने में बहुत जलन
  • पेशाब करने में दर्द होना
  • बार-बार पेशाब जाने की तीव्र इच्छा होना लेकिन जाने पर बहुत कम मात्रा में पेशाब आना
  • पेशाब का रंग बदल जाना, कोला या चाय की तरह होना
  • पेशाब में खून का आना
  • पेशाबम में पस आना
  • पेशाब में दुर्गंध (odor) आना
  • महिलाओं के पेल्विस (pelvis) में दर्द होना
  • पुरुषों के मलाश्य में दर्द होना
  • पहले की अपेक्षा पेशाब में गाढ़ापन आ जाना

पेशाब में संक्रमण (UTI) के कारण

  • UTI का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना गया है मूत्रमार्ग (urethra) का गुदा (anus) के पास होना, आंत से आया बैक्टीरिया (ई. कोली) कभी-कभी आपके गुदा से मूत्रमार्ग में प्रवेश कर जाता है। इसके बाद यह बैक्टीरिया मूत्रमार्ग से ब्लैडर और फिर किडनी तक पहुँच जाता है।
  •  पुरुषों (20 सेमी) की तुलना में महिलाओं में मूत्रमार्ग (4 सेमी) कम होता है, इसलिए बैक्टीरिया मूत्राशय तक अधिक आसानी से पहुंचते हैं। इसलिए, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में UTI आम है।
  • असुरक्षित यौन संबंधों से भी बैक्टीरिया आपके मूत्रमार्ग या ब्लैडर में प्रवेश कर सकता है।
  • कुछ महिलाओं को उनके अनुवांशिक मामलों के चलते UTI होने की अधिक संभावना होती है।
  • मधुमेह (diabetes) से पीड़ित महिलाओं और पुरुषों को UTI होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली (immune systems) कमजोर होता है और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद नहीं कर पाता।
  • पुरुषों की बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथी या मूत्राशय में पेशाब को रोक सकती है जिससे यह संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • चिकित्सा उपकरणों से मूत्र पथ की जांच या हाल ही में मूत्र सर्जरी, दोनों ही यह संक्रमण होने का खतरा बढ़ा सकते हैं।
  • इनके अलावा अन्य कारण जैसे- हार्मोन परिवर्तन, किडनी की पथरी, कोई दौरा या रीढ़ की हड्डी की चोट आदि भी UTI होने के खरते को बढ़ा सकती हैं।

गर्भावस्था के दौरान पेशाब में संक्रमण (UTI)

गर्भावस्था के दौरान UTI का होना काफी कष्टदायक होता है, अगर इस संक्रमण का समय पर इलाज न किया जाए तो गर्भावस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है यहाँ तक कि असामयिक प्रसूती (pre-mature delivery) की भी आशंका होती है। साथ ही बच्चे के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। गर्भावस्था में UTI का खतरा ज्यादातर छठे सप्ताह से 24वें सप्ताह के बीच रहता है।

गर्भावस्था के दौरान UTI होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे- शारिरिक या हार्मोनल बदलाव होना, बैक्टीरिया (ई. कोली), असुरक्षित यौन संबंध और ग्रुप-बी स्ट्रेप्टोकोकस (Streptococcus agalactiae) बैक्टीरिया। हालांकि गर्भावस्था में UTI होना सामान्य  बात है, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले बदलावों के चलते शरीर काफी संवेदनशील हो जाता है, जिससे यह संक्रमण हो सकता है। गर्भावस्था में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बढ़ने से मूत्रवाहिनियों की मांसपेशियां शिथिल हो सकती हैं, जिससे बैक्टीरिया पनप सकता है।

UTI के सामान्य लक्षणों के साथ गर्भावस्था में इसके लक्षण कुछ अलग हो सकते हैं जैसे- जी-मिचलाना और उल्टी आना, हल्का बुखार आना (101 फारेनहाइट या उससे कम), कभी गर्मी लगना, कभी ठंड महसूस होना। गर्भावस्था के दौरान आपको इस तरह के लक्षण देखाई देते हैं तो तुरंत अपनी डॉक्टर से मिलकर इलाज शुरु कराएँ। बिना कोई लक्षण दिखे, गर्भावस्था के 12वें या 16वें सप्ताह में युरिन कल्चर परीक्षण जरूर कराना चाहिए। इससे संक्रमण होने से पहले ही उसकी रोकथाम की जा सकती है।

 (UTI) को पहचानने के लिए कौन से परीक्षणों की होती है जरूरत

  • युरीन कल्चर परीक्षण (urine culture test)- इस परीक्षण के माध्यम से विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि कौन से बैक्टीरिया के कारण संक्रमण हुआ है। साथ ही इसी परीक्षण के अनुसार ही आपके UTI में कौन सी दवाइयाँ या आंटीबायोटिक देनी है, विशेषज्ञ तय करते हैं। इस जाँच का परिणाम (report) आने में लगभग 48 घंटे यानि 3 दिन लगते हैं।
  • मूत्र-विश्लेषण (Urinalysis test)- यह परीक्षण आपकी लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं और बैक्टीरिया को जानने के लिए किया जाता है। आपके मूत्र में पाए जाने वाली सफेद और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या संक्रमण की गेभीरता के बारे में बताती है।
  • अल्ट्रासाउंड या कंप्यूटराइज़्ड टोमोग्राफी (computerized tomography test)- ये दोनों ही परीक्षण तब किए जाते हैं जब आपको इलाज के बावजूद बार-बार UTI हो रहा हो और विशेषज्ञ को शंका हो कि कहीं आपके मूत्र पथ (urinary tract) में कोई असामान्यता तो नहीं।
  • मूत्राशयदर्शन परीक्षण (cystoscopy test)- विशेषज्ञआपके मूत्रमार्ग और मूत्राशय के अंदर देखने के लिए एक लंबी, पतली ट्यूब के साथ लेंस (सिस्टोस्कोप)  का उपयोग करते हैं। परीक्षण की विधि को सिस्टोस्कोपी कहा जाता है। सिस्टोस्कोप आपके आपके मूत्राशय से होते हुए  मूत्रमार्ग में डाला जाता है। इस जाँच को बहुत ही कम लोगों पर किया जाता है, आमतौर पर जिनके लिए संक्रमण गंभीर रूप ले चुका हो या बार-बार हो रहा हो।

पेशाब में संक्रमण (UTI) का इलाज

पेशाब में संक्रमण (UTI) के इलाज के लिए एंटीबायोटिक्स को आमतौर पर सबसे कामगार माना जाता है। आपका डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य स्थिति और संक्रमण के कारण के अनुसार आपको एंटीबायोटिक्स की सलाह देता है। इसके अलावा इलाज आपके मूत्र में पाए जाने वाले बैक्टीरिया के प्रकार और मात्रा पर भी निर्भर करता हैं।

आमतौर पर सामान्य UTI के इलाज के लिए ये दवाएँ विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए-

  • ट्राईमेथोप्रिम / सल्फामेथोक्साज़ोल (Trimethoprim/sulfamethoxazole) (बैक्ट्रीम, सेप्ट्रान, अन्य) (Bactrim, Septran, others))
  • फोसफोमाइसिन (मोनारोल) (Fosfomycin (Monurol))
  • नाइट्रोफुरेंटोइन (मैक्रोडेंटिन, मैक्रोबिड) (Nitrofurantoin (Macrodantin, Macrobid))
  • सेफ्लेक्सिन (केफ्लेक्स) (Cephalexin (Keflex))
  • सेफ्ट्रीएक्सोन (Ceftriaxone)

पेशाब में संक्रमण (UTI) को ठीक करने के घरेलू इलाज

 प्रत्येक मरीज की स्वस्थ्य स्थिति समान नहीं होती इसी लिए हर किसी के लिए, किसी बीमारी का इलाज भी समान नहीं हो सकता। UTI एक सामान्य संक्रमण है लेकिन सही इलाज के अभाव में यह गंभीर रूप भी ले सकता है। ऐसे में मरीज को चाहिए कि वह विशेषज्ञ से ही बीमारी का इलाज कराए और उसी की सलाह के अनुसार ही घरेलू इलाज भी करे। ये नुस्खे संक्रमण को रोकने में मदद करते हैं, लेकिन संक्रमण होने पर सीमित भूमिका ही निभाते हैं।

क्या हैं UTI की रोक-थाम के लिए कुछ असरदार घरेलू नुस्खे जानिए-

  • पानी अधिक मात्रा में पिएँ, 6 से  8 गिलास रोजाना। इससे जल्दी-जल्दी पेशाब आने से बैक्टीरिया पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाता है।
  • विटामिन-सी ज्यादा मात्रा में लें इससे पेशाब की अम्लता (acidity) बढ़ती है जो बैक्टीरिया को खत्म करने में कामगार होती है।
  • क्रैनबेरी (करोंदे) का जूस पिएँ, क्रैनबेरी जूस बैक्टीरिया को मूत्र पथ में बढ़ने से रोकता है जिससे संक्रमण कम होता चला जाता है। इसके अलावा क्रैनबेरी के अर्क युक्त गोलियाँ आपको आसानी से मिल सकती हैं।
  • अपनी निजि सफाई का ध्यान रखें जैसे- रोज नहाना, ढीले अंदरूनी कपड़े पहनना और उन्हें रोज बदलना, बाथरूम जाने पर मूत्रमार्ग की अच्छे से सफाई करना।
  • संभोग के बाद पेशाब जरूर जाएँ
  • पेशाब को रोक कर न रखे हर 2-3 घंटे में मूत्राशय को खाली करते रहें।
  • साफ बाथरूम का ही इस्तेमाल करें
  • मल त्याग के बाद आगे से पीछे तक अपने आप को साफ करें
  • असुरक्षित यौन संबंधों से बचें

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