पेशाब में खून: प्रकार, कारण, जाँच, इलाज

पेशाब में खून आना (blood in urine), आपकी किडनी या मूत्र-प्रणाली में किसी तरह की क्षति को दर्शाता है। पेशाब में खून आने के इस रोग को चिकित्सकीय शब्दों में hematuria कहा जाता है। यह शब्द hemato और uria से मिलकर बना है, जिसमें hemato का अर्थ होता है रक्त या रक्तकण और uria का अर्थ होता है पेशाब (मूत्र) में उपस्थित अर्थात पेशाब में उपस्थ्ति रक्त। इसके अलावा इसे रक्तमेह नाम से भी जाना जाता है। इस बीमारी में पेशाब के जरिए लाल रक्त कोशिकाएँ शरीर से बाहर आने लगती हैं।

 दरअसल हमारी किडनी में स्थित नेफ्रॉन नामक सूक्ष्म छन्नियाँ खून को पेशाब के साथ आने से रोकती हैं। अगर आपके पेशाब में खून आ रहा है तो जाहिर है कि या तो आपकी किडनी में कोई समस्या है या फिर मूत्र-प्रणाली के अन्य अंग मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग में कोई परेशानी है।

पेशाब में खून (hematuria) के प्रकार

सूक्ष्म हेमट्यूरिया (Microscopic hematuria)-

इस प्रकार के हेमट्यूरिया को हमारी आँखों से नहीं देखा जा सकता। इसमें पेशाब में आने वाले रक्त का मात्रा इतनी कम होती है किउसे माइक्रोस्कॉप के जरिए ही पता लगाए जा सकते हैं।

स्पष्ट हेमट्यूरिया (Gross hematuria)-

इस प्रकार केहेमट्यूरियामें पेशाब का रंग चाय या कोला जैसा हो जाता है, और कई बार यह सिर्फ रक्त हो सकता है जो मूत्र मार्ग से निकलता है। इसमें हम पेशाब में आने वाले रक्त को अपनी आँखों से देख सकते हैं।

पेशाब में खून (hematuria) के कारण

पेशाब में खून आने के कारण हमेशा किडनी की समस्याएँ ही नहीं होती, कभी-कभी किन्हीं अन्य कारणों से भी पेशाब में खून आने की समस्या हो सकती है। क्या हैं वे कारण जिनकी वजह से पेशाब में खून (hematuria) होता है जानिए-

मूत्रमार्ग संक्रमण (Urinary tract infection)-

UTI मूत्र-प्रणाली में होने वाला एक आम बैक्टीरियल संक्रमण है। इसे एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक किया जा सकता है। यदि समय से इसका इलाज नहीं कराया जाता है तो यह गंभीर रूप ले सकता है, जिसके कारण पेशाब में खून आ सकता है। UTI का एक और मुख्या लक्षण है पेशाब में जलन (“dysuria”) है।

मूत्राशय या किडनी में पथरी होना-

पथरी किडनी और पूरी मूत्र-प्रणाली को  प्रभावित करती है। जिसके कारण कभी-कभी रोगी के पेशाब में खून आने की समस्या भी हो जाती है। पथरी की बीमारी में पेशाब में खून के साथ किडनी में तीव्र दर्द भी हो सकता है।

पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथी का बढ़ना-

प्रोस्टेट ग्रंथी जो मूत्राशय के ठीक नीचे और मूत्रमार्ग के ऊपरी भाग के पास होती है, वह एक उम्र में आकर बढ़ जाती है। इससे मूत्रमार्ग सिकुड़ जाता है और पेशाब करने में समस्या होती है, जिसके चलते पेशाब में खून आ जाता है।

ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (glomerulonephritis) जैसी किडनी की बीमारियाँ-

किडनी में सूजन आदि जैसी बीमारियाँ जिनसे किडनी की फिल्टरिंग क्षमता पर बुरा असर पड़ता है, वे भी पेशाब में खून आने का कारण होती हैं।

  • किडनी कैंसर या मूत्राशय का कैंसर
  • एस्पिरिन, क्लोपिडोग्रेल, वारफेरिन जैसी रक्त पतला करने वाली दवाएं।
  • यौन संक्रमित रोग
  • किसी कारण से प्लेटलेट्स कम होना

पेशाब में खून आने की चेतावनी के क्या होते हैं संकेत

आम तौर पर सूक्ष्म हेमट्यूरिया (Microscopic hematuria)लक्षण नहीं दिखाता। लेकिन अगर आपको स्पष्ट हेमट्यूरिया (Gross hematuria) है तो आपके पेशाब का रंग बदल जाएगा। आपके पेशाब का रंग गुलाबी, लाला या कोला रंग का हो सकता है। ग्रॉस हेमट्यूरिया खून के थक्के भी आ सकते हैं जिनके कारण मरीज को दर्द हो सकता है। इसके अलावा हेमट्यूरिया कुछ अन्य लक्षण भी दिखाता है जैसे-

बुखार-हेमट्यूरिया में बुखार तब आता है जब किडनी के गंभीर संक्रमण या मूत्रमार्ग संक्रमण हो।

गंभीर दर्द- किडनी या मूत्र-प्रणाली मे पथरी कारण पेट में तेज दर्द हो सकता है।

मितली या उल्टी आना- पेशाब में खून के साथ अगर आपको रमिचली या उल्टी आती है तो किडनी की विफलता या किडनी में सूजन आने की सूचना दे सकती है।

पेशाब में खून (hematuria) के लिए कौन से कराँए टेस्ट

अगर आपको भी शंका है कि कहीं आपको भी हेमट्यूरिया तो नही, विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार कुछ टेस्ट करा सकते हैं। इन टेस्टों के माध्यम से आपके विशेषज्ञ को यह जानने में मदद मिलेगी कि आपकों पेशाब में खून आने का मूल कारण क्या है। कौन-कौन से होते हैं वे टेस्ट जानिए-

KFT (Kidney function test)-

KFT टेस्ट, किडनी की कार्यक्षमता पहचानने वाली जाँचों का एक समूह है। इसके अलावा इसे RFT (renal function test)भी कहा जाता है। इस जाँच में KFT/RFT में रक्त यूरिया / रक्त यूरिया नाइट्रोजन, सीरम क्रिएटिनिन और eGFR जाँचेंशामिल होती हैं।

कुछ प्रयोगशालाएँ पेशाब में प्रोटीन की मात्रा पहचानने के लिए मूत्र विश्लेषण को भी KFT / RFT का हिस्सा बना सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड, यूरिक एसिड का रक्त स्तर भी KFT का हिस्सा हो सकता है। शरीर में इन सभी रसायनों का संतुलन बनाने का काम किडनी करती है। किडनी की इसी कार्यक्षमता को जाँचने के लिए किए जाने वाले परीक्षणों को KFT / RFT कहा जाता है।

हीमोग्लोबिन (Hemoglobin)-

हीमोग्लोबिन एक तरह का प्रोटीन होता है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर सारे शरीर में पहुँचाने का काम करता है। हीमोग्लोबिन टेस्ट आपके खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा को नापता है।

USG-KUB(ultrasonography of kidney, ureters and bladder)-

इस टेस्ट में किडनी, मूत्रवाहिनी और मूत्राशय का अल्ट्रासाउंड स्कैन किया जाता है। विशेषज्ञ USG-KUB टेस्ट का प्रयोग मरीज के मूत्र संबंधी रोगों और और पेट दर्द के कारणों का सटीक कारण जानने और इलाज निश्चित करने के लिए करते हैं।

CT Scan-

CT स्कैन जैसे इमेजिंग टेस्ट आम तौर पर किडनी के सिस्ट, ट्यूमर और पथरी को पहचानने के लिए किए जाते हैं। इस टेस्ट के माध्यम से विशेषज्ञ को कारण का सटीक स्थान जानने में मदद मिलती है।

सिस्टोस्कोपी टेस्ट (cystoscopy test)-

हेमट्यूरियाजैसी अन्य बीमारियों को जानने के लिए सिस्टोस्कोपी जाँच कराई जाती है। इसमें एक पतली ट्यूब होती है जिसे सिस्टोस्कोप कहा जाता है , इसके सिरे पर एक कैमरा और प्रकाश की व्यवस्था होती है। विशेषज्ञ सिस्टोस्कोप को मरीज के मूत्रमार्ग से डालकर मूत्राशय में ले जाता है और जाँच करता है कि पेशाब में खून का सटीक कारण क्या है।

पेशाब में खून (hematuria) का इलाज

पेशाब में खून आने के जिस प्रकार कई कारण हो सकते हैं उसी प्रकार इस रोग का इलाज भी कारणों पर निर्भर करता है। विशेषज्ञ की सलाह अनुसार परीक्षण करा कर सटीक कारण के पता लगने के बाद अपनी स्वास्थ्य स्थिति और रोग की गंभीरता के हिसाब से इलाज निश्चित किया जाएगा।

यदि आपको पेशाब में खून किसी संक्रमण के कारण आ रहा है तो विशेषज्ञ आपको एंटिबायोटिक दवाओं का कोर्स दे सकता है। इसके अलावा अगर आपके पेशाब में खून आने का कारण अन्य समस्या जैसे किडनी की पथरी, कैंसर आदि है तो उसके लिए विशेषज्ञ दूसरा इलाज करेगा।

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