विटामिन डी: कैसे बनता है, स्रोत, फायदे, समस्या, नार्मल स्तर

क्या होता है विटामिन डी, दरअसल यह विटामिन हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण विटामिनों में से एक है। विटामिन डी शरीर में कई महत्वपूर्ण काम करता है। विटामिन डी का प्रभाव विशेष रूप से हड्डियों के साथ-साथ शरीर की सभी प्रणालियों पर पड़ता है।

विटामिन डी क्या होता है

विटामिन डी वसा में आसानी से घुल जाने वाले स्रावी स्टेरॉयड (sect-steroids) का एक समूह है, इसके अंतर्गत D-1, D-2, और D-3 आतो हैं। विटामिन डी कैल्शियम, मैग्नीशियम, और फॉस्फेट जैसे अन्य पोशक तत्वों को आंतों द्वारा अवशोषित होने में मदद करता है। विटामिन डी को “सनशाइन विटामिन (sunshine vitamin)” भी कहा जाता है क्योंकि यह सूरज की रोशनी के माध्यम से त्वचा में पैदा होता है।

 जिन लोगों  के शरीर में विटामिन डी की मात्रा की कमी होती है, उनकी हड्डियां कमजोर और पतली हो जाती है। बच्चों में होने वाले हड्डियों के इस रोग को रीकेट्स और व्यस्कों में ओस्टोमैलेशिया (osteomalacia) कहा जाता है।

शरीर में कैसे बनता है विटामिन डी

जब हमारी त्वचा सूरज की रोशनी (धूप) के संपर्क में आती है, तब कोलेस्ट्रॉल के माध्यम से से विटामिन डी बनाती है। सूर्य की रोशनी से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट बी (ultraviolet B, UVB ) किरणें त्वचा की कोशिकाओं में जाकर कोलेस्ट्रॉल नामक पदार्थ से टकराती हैं, जिससे संश्लेषण की प्रक्रिया होती है और शरीर में विटामिन डी बनता है।

 हालांकि जरूरत से अधिक सूरज की रोशनी के नुकसान भी हो सकते हैं जैसे त्वचा में जलन, एलर्जी और त्वचा लाल पड़ जाना। इसी कारण हमें सूरज की रोशनी पर्याप्त मात्रा में और निश्चित समय के लिए ही लेनी चाहिए।

विटामिन डी के उत्पादन में किडनी की भूमिका

शरीर में विटामिन डी के चयापचय में किडनी की महत्वपूर्ण भूमिका है। सूरज की रोशनी से त्वचा में उत्पन्न होने वाला विटामिन डी निष्क्रिय रूप में होता है। किडनी इस निष्क्रिय विटामिन डी को सक्रिय विटामिन डी में बदलती है। इस सक्रिय रूप को कैल्सीट्रियोल ( calcitriol) कहा जाता है। यह तत्व विटामिन डी के अधिकांश कामों के लिए जिम्मेदार होता है।

यदि आपकी किडनी, किडनी की खराबी से जूझ रही हैं तो, विटामिन डी को शरीर के हिसाब से सक्रिय रूप में बदलना कम या बंद कर सकती है। जिससे शरीर में विटामिन डी का स्तर कम या कभी-कभी गंभीर रूप से कम हो सकता है।

क्या हैं विटामिन डी के खाद्य स्रोत

विटामिन डी एक-मात्र ऐसा पोशक तत्व है जिसे हमारा शरीर सूरज की रोशनी से प्राप्त करता है। हालांकि अध्ययनों का मानना है कि विश्व की लगभग 50 फीसदी जनसंख्या विटामिन डी को पर्याप्त मात्रा में प्राप्त नहीं कर पाती। जिसकी मुख्य वजह लोगों का धूप से बचना और अंदर रहना है। ऐसे में सवाल आता है कि बिना धूप में जाए पर्याप्त विटामिन डी कैसे प्राप्त किया जाए।

गौरतलब है कि विटामिन डी सूरज की रोशनी और कुछ खाद्य पदार्थों से हमें मिल सकता है। तो विटामिन डी केवल पशुओं (मछलियों) से प्राप्त होने वाला विटामिन है, इसलिए शाकाहारियों को मुख्य रूप से विटामिन डी के लिए सूरज की रोशनी पर निर्भर रहना पड़ता है। जिससे शाकाहारियों में विटामिन डी की कमी का खतरा बढ़ जाता है। खाद्य पदार्थों में मशरूम एकमात्र शाकाहारी वस्तु है जिसमें वीटामिन डी होता है।

क्या ऐसे खाद्य पदार्थ जो शरीर में विटामिन डी की आपूर्ति करते हैं जानिए-

  • साल्मन (Salmon), हेरिंग (Herring) और सार्डिन (sardines) जैसी वसायुक्त मछलियाँ जो विटामिन डी का महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • कॉड मछली के लीवर का तेल
  • अंडे की जर्दी (Egg yolks)
  • मशरूम

इन सभी खाद्य पदार्थों में विटामिन डी प्रकृतिक रूप से नहीं पाया जाता, लेकिन इन्हें पैक करते समय इनमें कुछ मात्रा में मिला दिया जाता है (fortification)।

  • गाय का दूध और सोया का दूध
  • संतरे का रस (Orange juice)
  • अनाज और ओट्स

क्या हैं शरीर में विटामिन डी के फायदे

विटामिन ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर नहीं बना सकता, इसलिए एक व्यक्ति को आहार में इनका सेवन करना चाहिए। हालांकि, शरीर विटामिन डी का उत्पादन सूरज की रोशनी और आहार दोनों से कर सकता है। क्या होते हैं इस विटामिन के शरीर में फायदे-

  • हड्डियों और दाँतो को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखना
  • शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को बनाए रखने में सहयोग करना
  • मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को  स्वस्थ रखना
  • इंसुलिन (insulin) और शुगर का संतुलन बनाए रखना
  • फेफड़ों की कार्यक्षमता और हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखना
  • कैंसर के विकास में शामिल जीन्स को प्रभावित करना

क्या हैं विटामिन डी की कमी से होने वाली समस्याएँ

हालांकि हमारा शरीर विटामिन डी का उत्पादन कर सकता है, इसके बावजूद भी किन्ही कारणों से शरीर में इसकी कमी हो सकती है। विटामिन डी इस कमी के कारण शरीर में कई तरह की समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। क्या हैं वे समस्याएँ जानिए-

  • थकान और सुस्त महसूस करना
  • हड्डियों और पीठ में दर्द होना
  • मन उदास रहना
  • बाल झड़ना
  • मासपेशियों में दर्द होना
  • कोई घाव जल्दी से न भर पाना
  • कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली

यदि विटामिन डी की कमी लंबे समय से चली आ रही हो तो क्या समस्याएँ आती हैं-

  • ह्रदय संबंधी रोग होना
  • ऑटोइम्यून समस्याएं बढ़ जाना
  • स्नायविक रोग (neurological diseases)
  • गर्भावस्था में जटिलताएँ
  • स्तन कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और कोलन कैंसर जैसे कई कैंसर का जोखिम बढ़ता है
  • शरीर में अन्य तरह के संक्रमण होना

क्या होता है रक्त में विडामिन डी का सामान्य स्तर

हमारे सरीर में सामान्य रक्त सीरम का स्तर 40 से 80 नैनोग्राम प्रति मिलीलीटर होता है। रक्त स्तर के आधार पर, आपको अधिक विटामिन डी की आवश्यकता हो सकती है। ड्रग्स और विटामिन के लिए IU मापक का प्रयोग किया जाता है। यह एक मानक है जिसका शाब्दिक रूप International Units है। इस मानक के अनुसार किस उम्र समूह के लोगों के शरीर को कितने विटामिन डी की जरूरत होती है जानिए-

  • जन्म से 12 माह तक – 400 IU
  • 1 साल से 18 साल तक – 600 IU
  • 18 से 70 साल तक – 800 IU
  • गर्भावस्था व स्तनपान कराने वाली माँ – 600 IU नैनो

विटामिन डी की कमी को दूर करने का इलाज

 विटामिन डी की कमी की रोकथाम और इसके लिए अपनाया जाने वाले इलाज का लक्ष्य एक ही है – शरीर में विटामिन डी को पर्याप्त स्तर तक पहुंचने और उसके संतुलन को बनाए रखना। साथ ही सूरज की रोशनी और विटामिन डी की खुराक लेने के लिए कहा जा सकता है।

सुरक्षित रूप से सूरज की रोशनी से कैसे प्राप्त कर सकते हैं विटामिन डी-

विटामिन डी को “सनशाइन विटामिन” क्यों कहा जाता है, इसका एक कारण है। विटामिन डी शरीर में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है, जो स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। उदाहरण के लिए विटामिन डी हमारी आंतों की कोशिकाओं को कैल्शियम और फास्फोरस जैसे खनिजों को सोखने का निर्देश देता है। कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूत और स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है। मुख्य रूप से विटामिन डी मछलियों और मांसाहार में पाया जाता है।

यदि आप शाकाहारी हैं तो विटामिन डी पाने के लिए आपको सूरज की रोशनी पर निर्भर रहना पड़ता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सूरज की अल्ट्रावॉयलेट-B किरणें खिड़कियों के माध्यम से आपकी त्वचा में प्रवेश नहीं कर सकती। इसलिए आम तौर पर जो लोग घर के अंदर रहते हैं वे मुख्य रूप से विटामिन डी की कमी से ग्रस्त होते हैं। कैसे लें सुरक्षित रूप से विटामिन डी जानिए-

गर्मियों के दिनों में, दोपहर के समय सूरज की रोशनी पाने का सबसे अच्छा समय होता है, क्योंकि इस समय सूरज की अल्ट्रावॉयलेट किरणें तेज होती हैं। इसलिए आपको इस समय रोशनी में कम समय के लिए रहना पड़ेगा। कई अध्ययनों में पाया गया है कि कि दोपहर के समय विटामिन डी बनाने में शरीर सबसे सक्षम होता है।

  • हफ्ते में तीन बार १५-३० मिनट तक धूप में रहने से विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में मिल सकता है।
  • इस से ज़्यादा समय धुप में बिताते हैं तो सनस्क्रीन लगाना उचित होगा। 
  • ज़्यादा धूप  में रहने के अपने जोखिम होते हैं जैसे सनबर्न, तापघात और आँखों का नुक्सान। इसलिए सावधानी से धूप का उपयोग करें।  

विटामिन डी की आपूर्ति किस प्रकार करनी चाहिए जानिए-

विटामिन डी के स्तर का रक्त में मापने के लिए 25(OH)D का प्रयोग किया जाता है। इस मापक का अर्थ है कि शरीर में विटामिन डी कितनी मात्रा में है। दिए गए स्तरों के अनुसार किसी के शरीर में विटामिन डी के स्तर को मापा जा सकता है-

पर्याप्त मात्रा में : 25(OH)D पर 20 ng/ml (50 nmol/l)  से अधिक

अपर्याप्त मात्रा में : 25(OH)D पर 20 ng/ml (50 nmol/l)  से कम

अपूर्ण या कम : 25(OH)D पर 12 ng/ml (25 nmol/l)  से कम

आपके शरीर को कितने विटामिन डी की आवश्यकता है, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इन कारकों में उम्र, नस्ल, मौसम, सूरज का प्रदर्शन, कपड़े और बहुत कुछ शामिल हैं। इसके अलावा अधिक वजन वाले या मोटे लोगों को अधिक मात्रा में विटामिन डी की आवश्यकता हो सकती है। इन सभी आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर माना जाता है कि व्यक्ति को आम तौर पर 1000-4000 IU विटामिन डी की  दैनिक तौर पर सेवन करना चाहिए। जो भी हो विटामिन डी का सेवन एक डॉक्टर की सलाह पे ही करें।  

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