पॉलीसिस्टिक किडनी रोग: कारण, लक्षण, जांच, इलाज, जटिलताएं

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD), (Polycystic kidney disease) किडनी की एक बीमारी है जिसमें किडनी पर पानी जैसे तरल से भरे बुलबुले नुमा संरचनाएँ बन जाती हैं। इस रोग का चिकित्सक नाम ऑटोसोमल डॉमिनेन्ट पॉलीसिस्टिक किडनी रोग autosomal dominant PKD (ADPKD) लेकिन दैनिक भाषा में इसे पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (Polycystic kidney disease, PKD) ही कहा जाता है। मुख्य तौर पर पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) वंशानुगत रोग है, अर्थात अगर आपके परिवार में किसी को यह बीमारी हुई है तो इसकी आशंका है कि आपको भी यह बीमारी हो। यह किडनी का एक आम रोग है, और यह किडनी विफलता का प्रमुख कारण है।

क्या होता है पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD)

मुख्य रूप से पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (Polycystic kidney disease) एक वंशानुगत बीमारी है इसका सीधा संबंध मरीज के जीन से होता है। यह रोग किडनी के उन ऊतकों (tissue) को नुकसान पहुँचाता है, जिनसे किडनी बनी होती हैं। किडनी के अंदर पानी जैसे तरल से भरे बुलबुले जैसी संरचना बन जाती है, जो किडनी के भार और आकार को बढ़ा देती है।

सामान्य तौर पर स्त्री और पुरुषों दोनों में ही रोग एक समान होता है। यह रोग किडनी विफलता का एक ठोस कारण है साथ ही इसमें इलाज के लिए डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। किडनी की बीमारियों के चलते जिन मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण या डायलिसिस होता उनमें से 5 प्रतिशत मरीज पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (Polycystic kidney disease) के होते हैं।

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) के लक्षण

इस रोग के काफी मरीज बीमारी से जुड़े लक्षणों का अनुभव किए बिना सालों तक रह सकते हैं। PKD के लक्षण किसी भी उम्र में सामने आ सकते हैं यहाँ तक कि बचपन में भी। लेकिन आम तौर पर PKD के लक्षण उम्र के मध्यम पड़ाव यानि 50-60 वर्ष या कभी-कभी वृद्धावस्था में सामने आते हैं।इसमें सिस्ट का आकार बढ़ने और उससे कोई परेशानी होने के साथ लक्षण दिखाई देने शुरु होते हैं। क्या हैं PKD के सामान्य लक्षण जानिए-

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) के कारण

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (Polycystic kidney disease) होने का कारण मुख्य तौर पर वंशानुगत स्थितियों को माना गया है। अगर मरीज के परिवार में पहले किसी को यह किडनी रोग हो तो जाहिर है कि आने वाली पीड़ियों को भी इस रोग से जूझना होगा।

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) परीक्षण और जाँच

विशेषज्ञ मरीज के परिवार के सदस्यों के बीमारी के इतिहास की समीक्षा करेंगे। साथ ही मूत्र परीक्षण, मरीज के मूत्र में रक्त, बैक्टीरिया या प्रोटीन को देखने के लिए किया जा सकता है।

PKD का पता लगाने के लिए, विशेषज्ञ किडनी, लीवर और अन्य अंगों के सिस्ट को देखने के लिए इमेजिंग परीक्षणों का उपयोग कर सकता है। PKD का पता लगाने के लिए उपयोग किए जाने वाले इमेजिंग परीक्षण हैं-

  • पेट का अल्ट्रासाउंड- इस परीक्षण को किडनी या लीवर के सिस्ट को देखने क लिए किया जाता है।
  • पेट का सीटी स्कैन- इस परीक्षण के माध्यम से किडनी में छोटे से छोटे सिस्ट को देखा और जाँचा जा सकता है।
  • पेट का एमआरआई- इस परीक्षण के द्वारा किडनी और सिस्ट की संरचना को जाँचने के लिए किया जाता है।
  • GFR रक्त परीक्षण- इस परीक्षण के माध्यम से विशेषज्ञ यह जाँच करता है कि मरीज की किडनी कार्यक्षमता सही है या नहीं।

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) का इलाज

PKD का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों की रोक थाम करके इससे होने वाली किडनी की विफलता को रोका जा सकता है। साथ ही एक बात यह भी है कि PKD के लक्षण एक निश्चित समय पर सामने आते हैं। अगर मरीज समय रहते इसे नियंत्रित करना चाहता है तो इसके लिए उसे विशेषज्ञ की सलाह की आवश्यकता होती है। सलाह के अनुसार किडनी की कुछ जाँचे नियमित रूप से कराते रहना चाहिए। क्योंकि जाँचों के माध्यम से ही ऐसी अलक्षणिक बीमारी समय से पता लग जाती हैं और उसका इलाज शुरु किया जा सकता है।

विशेषज्ञ PKD के मरीज के इलाज में शामिल कर सकता है-

  • PKD के मरीज को नियमित रूप से जाँच की सलाह दी जाती है चाहे उसे किसी निश्चित इलाज की जरूरत न हो।
  • उच्च रक्त-चाप को नियंत्रण में रखने के लिए उचित दवाएँ दी जा सकती है।
  • मूत्रमार्ग में संक्रमण और पथरी जैसी समस्याओं का तुरंत इलाज शुरु करना।
  • विशेषज्ञ मरीज को ऐसा आहार लेने को कह सकता है जिसमें सोडियम कम मात्रा में हो।
  • अगर PKD उस चरण तक पहुँच चुका है जब यह किडनी विफलता का कारण बन जाता है तो विशेषज्ञ मरीज को डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की सलाह दे सकता है। स्थिति अधिक गंभीर हो जाने पर ऐसा भी हो सकता है कि मरीज की दोनों किडनी निकालनी पड़ जाएँ।

पॉलीसिस्टिक किडनी रोग (PKD) में होने वाली जटिलताएँ

PKD के सामान्य लक्षणों के साथ-साथ मरीज को अन्य जटिलताओं का भी सामना करना पड़ सकता है। क्या हैं वे जटिलताएँ जानिए-

  • दिमाग तक रक्त पहुँचाने वाली धमनियों की परत या दीवार कमजोर हो जाना।
  • लीवर के अंदर या बाहर सिस्ट हो जाना।
  • अग्न्याशय और अंडकोष में सिस्ट हो जाना।
  • सिस्ट के फटने से रक्तस्राव होना।
  • उच्च रक्त-चाप (high blood pressure)
  • लीवर की विफलता
  • किडनी में पथरी
  • ह्रदय रोग

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