हाइपोनैट्रीमिया: लक्षण, कारण, इलाज, रोकथाम, खतरा

हाइपोनैट्रीमिया क्या है, दरअसल यह एक ऐसा रोग होता है जिसमें आपके शरीर के रक्त में स्थित सोडियम का स्तर सामान्य से नीचे हो जाता है। सोडियम एक इलेक्ट्रोलाइट है जो हमारे शरीर की कोशिकाओं में और उनके आस-पास के पानी को नियंत्रित और संतुलित करके रखता है। इसके अलावा ही शरीर में रक्त प्रवाह, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के लिए इसकी आवश्यकता होती है। हाइपोनैट्रीमिया दो शब्दों से मिलकर बना है – “हाइपो (hypo)” जिसका अर्थ है निम्न या कम और “नैट्रियम (natrium)”, एक लैटिन भाषा का शब्द जिसका अर्थ होता है सोडियम। अर्थात हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia) का शाब्दिक अर्थ सोडियम की कमी है।

जरूरत से अधिक पानी पीना भी हमारे शरीर में सोडियम के स्तर को कम करके हाइपोनैट्रीमिया को जन्म दे सकता है। इससे कोशिकाओं में या उनके आस-पास अधिक पानी भर जाने से कोशिकाओं में सूजन आ जाती है। कोशिकाओं में आई यह सूजन यदि दिमाग तक पहुँच जाती है तो जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

यह पता लगाने के लिए कि आपको हाइपोनैट्रीमिया है कि नहीं तो इसके लिए आपको जानना चाहिए कि रक्त में सोडियम का स्तर कितना होना चाहिए। रक्त में सामान्य सोडियम का स्तर 135 से 145 mEq / L होता है। जब रक्त में सोडियम का स्तर 135 mEq / L से नीचे चला जाता है तो जाहिर है आपको हाइपोनैट्रीमिया हो सकता है।

हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia) के लक्षण

आमतौर पर हाइपोनैट्रीमिया अपने लक्षण नहीं दिखाता, यह रोग तब अपने लक्षण दिखाता है जब रक्त में सोडियम का स्तर अचानक से गिर जाता है या सोडियम की मात्रा बहुत बड़ी मात्रा में नीचे चली जाती है। क्या हो सकते हैं हाइपोनैट्रीमिया के सामान्य लक्षण जानिए-

  • उल्टी और मितली।
  • सिरदर्द, थकान और भ्रम
  • मांसपेशियों में कमजोरी, मरोड़ और ऐंठन से दर्द
  • बेचैनी और चिड़चिड़ा स्वभाव
  • गंभीर मामले में स्थिति दौरे पड़ने और कोमा तक पहुँच सकती है।

हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia) के कारण

रक्त में सोडियम का स्तर कम होने का मूल कारण शरीर में बहुत अधिक पानी या तरल पदार्थ जमा होना होता है। अगर बात की जाए हाइपोनैट्रीमिया के कारणों की तो यह कुछ बीमारियों और दवाओं का परिणाम के साथ-साथ गुर्दे की बीमारी से संबंधित भी हो सकते हैं। क्या हैं वे कारण जानिए-

  • बेकार पदार्थों को छानकर शरीर से बाहर निकालने की किडनी की कार्यक्षमता में कमी आ जाना या किडनी विफल (Kidney failure) हो जाना।
  • ह्रदय संबंधी विकार जिनके कारण शरीर में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है।
  • मूत्रवर्धक दवाओं का उपयोग
  • दस्त या उल्टी होना जिससे पानी के मुकाबले ज्यादा सोडियम शरीर से बाहर निकल जाता है।
  • शरीर के सोडियम, पोटेशियम और पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करने वाली अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) में कोई असामान्यता आ जाना।
  • अत्याधिक पानी या पेय पदार्थों का सेवन करना। एक दिन में 10 लीटर से अधिक पानी पीना भी आपके लिए हाइपोनैट्रीमिया का कारण बन सकता है।
  • हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyroidism)
  • दिमाग की कोई चोट या जखम (Brain injury)
  • शरीर में किसी प्रकार का कैंसर
  • मनोरोग बीमारियों और कैंसर के इलाज में ली जाने वाली दवाइयाँ या कीमोथेरेपी
  • लीवर का विफल होना
  • फेफड़ों का संक्रमण जैसे टीबी या निमोनिया 

हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia) का इलाज

हाइपोनैट्रीमिया के कई कारण होने के नाते इस रोग का इलाज इसकी गंभीरता और अंतर्निहित कारण को ध्यान में रखकर विशेषज्ञ द्वारा निश्चित किया जाता है। यदि आप अचानक से गंभीर हाइपोनैट्रीमिया का मामला लेकर विशेषज्ञ के पास जाते हैं तो जरूरी है विशेषज्ञ इलाज के लिए आपको 2 से 3 दिन के लिए अस्पताल में रहने की सलाह दे सकता है। हाइपोनैट्रीमिया के इलाज के लिए बहुत अनुभव और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। यह केवल एक विशेषज्ञ द्वारा किया जाना चाहिए।  इसके अलवा अगर आपका मामला अधिक गंभीर नहीं है तो विशेषज्ञ आपके लिए सामान्य इलाज निश्चित कर सकता है जैसे-

  • अंतःशिरा द्रव (Intravenous fluid)- यह प्रक्रिया आम तौर पर अस्पताल में की जाती है। इसमें आपके शरीर के रक्त में सोडियम की कमी को आपकी नसों के माध्यम से सोडियम चढ़ाकर पूरा किया जाता है।
  • सोडियम को बरकरार रखने वाली दवाएँ- ये दवाएँ किडनी संबंधित होती हैं, और इनसे किडनी शरीर में स्थित अधिक पानी को मूत्र बनाकर बाहर निकाल देती हैं। जिसके बाद सोड़ियम की मात्रा संतुलित हो जाती है।
  • ऐसे रोगी जिन्हें पानी प्रतिधारण की समस्या है उनके लिए पानी या तरल पदार्थ प्रतिबंधित किए जा सकते हैं।
  • कुछ मामलों में नमक ज़्यादा खाने की राय दी जा सकती है।
  • डायलिसिस- यदि आपकी किडनी की कार्यक्षमता कम या खत्म हो चुकी है, शरीर में जमा हुआ अधिक पानी डायलिसिस की प्रक्रिया के माध्यम से बाहर निकाला जा सकता है।

कैसे करें हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia) की रोकथाम

बीमारी के इलाज से बेहतर उसकी रोकथाम होती है, इसी तरह कुछ तरीकों से हाइपोनैट्रीमिया की भी रोकथाम की जा सकती है। क्या हैं हाइपोनैट्रीमिया की रोकथाम के तरीके जानिए-

  • यदि आपके हाइपोनैट्रीमिया का कारण हार्मोन्स का असंतुलन है जैसे अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) तो जरूरी है कि उसका इलाज पहले कराया जाए।
  • अपने हाइपोनैट्रीमिया के लक्षणों को पहचानकर उन पर नजर रखें, और विशेषज्ञ से परामर्श लें। विशेषज्ञ ऐसे में मूत्रवर्धक दवाएँ लेने की सलाह दे सकता है जिससे शरीर से अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाए।
  • यदि आप कसरत और दौड़ या अन्य खेलों में भाग लेते हैं तो पनी के स्थान पर स्पोर्ट्स पेय पदार्थ लें। इन पेय पदार्थों में इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं, जिसमें सोडियम शामिल है।
  • यदि आप किसी इलाज के चलते ऐसी दवाओं का सेवन करते हैं जिनके कारण हाइपोनैट्रीमिया होता है, तो अपने विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार सोडियम के स्तर की जाँच नियमित रूप से कराते रहें।

किन लोगों को होता हैं हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia)

  • बढ़ती उम्र के लोग जो अकसर पहले से  ही किसी बीमारी से जूझ रहे होते हैं या उनका किसी बीमारी का इलाज चल रहा होता है, उन्हें हाइपोनैट्रीमिया होने की आशंका कम उम्र के लोगों की अपेक्षा अधिक रहती है।
  • इसके अलावा अगर किसी भी उम्र में आप किडनी, ह्रदय की बीमारी से जूझ रहें हैं तो आपको भी हाइपोनैट्रीमिया होने की आशंका रहती है।
  • ड्रग्स और नशीले पदार्थों के आदी व्यक्ति को भी हाइपोनैट्रीमिया होने की आशंका रहती है।
  • अत्याधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों में भी हाइपोनैट्रीमिया हने की आशंका रहती है।
  • जब कोई मैराथॉन आदि जैसी गहन कसरतों के दौरान पानी का अत्याधिक सेवन करता है।
  • जब आप किसी इलाज के चलते ऐसी दवाएँ ले रहें हो जो हाइपोनैट्रीमिया का कारण हो सकती हैं।

क्यों खतरनाक है हाइपोनैट्रीमिया (Hyponatremia)

जब हाइपोनैट्रीमिया अल्पकालीन होता है तो रक्त का सोडियम स्तर तेजी से कम होता चला जाता है। सोडियम स्तर के कम होने का कारण शरीर में पानी का मात्रा अधिक हो जाना होता है। जिसके बाद यह पानी शरीर की कोशिकाओं के आस-पास जमा होकर उनमें सूजन पैदा कर देता है। जिसके बाद यह सूजन ही खतरनाक रूप लेकर मरीज के मस्तिष्क की कोशिकाओं तक पहुँच जाती है। यह सूजन कभी-कभी मरीज को कोमा, दौरा और मृत्यू तक लेकर जा सकती है।

समय से हाइपोनैट्रीमिया का इलाज किसी विशेषज्ञ से कराना अवाश्यक होता है, अन्यथा यह जीवन के लिए खतरा सिद्ध हो सकती है।

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