हाई ब्लड प्रेशर में ग्रीन-टी, कॉफ़ी, लहसुन, आमला, अंडा और दूध

आज के समय में पाँच में से हर दो व्यक्ति हाई बीपी (hypertension) की समस्या से परेशान हैं। अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें तब झेलनी पड़ती है, जब अपनी इस समस्या के कारण उन्हें अपने खान-पान पर रोक लगानी पड़ती है या उसे सीमित करना पड़ता है। दरअसल किसी भी बीमारी की रोकथाम में खान-पान एक बहुत अहम भूमिका निभाता है। बीपी (हाई ब्लड प्रेशर) कम करने के उपाय जैसे दवाओं आदि से ज़्यादा ज़रूरी है आपकी डाइट।

हाई बीपी के मरीजों के सामने एक दुविधा हमेशा रहती है की सही हाई बीपी या हाइपरटेंशन के लिए डाइट क्या है? वे क्या खांए और क्या न खांए? कभी-कभी वे खाने की हर चीज़ पर शक करते हैं और सोचते हैं, कि क्या यह मेरे लिए सही रहेगी या नहीं। कुछ इसी तरह के सवालों के जवाब देगा यह लेख कि हाई बीपी में ग्रीन-टी, कॉफ़ी, लहसुन, आमला, अंडा और दूध कैसे रहेंगे।

क्या हाई बीपी में दूध पिया जा सकता है ?

हाँ, हाई बीपी के मरीज दूध का सेवन कर सकते हैं। दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थों में कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम सहित रक्तचाप कम करने वाले कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं। दूध से बने खाद्य पदार्थों में एक विशेष प्रकार का प्रोटीन होता है, जिसे बायोएक्टिव पेप्टाइड्स (bioactive peptides) कहा जाता है। ये प्रोटीन बीपी के नियंत्रण पर अच्छा असर दिखाते हैं। इसलिए हाई बीपी की समस्या झेल रहे लोगों को दूध या उसे बने खाद्य पदार्थों का सेवन करने में बिल्कुल भी झिझकना नहीं चाहिए।

साथ ही मेरी सलाह है कि कम वसा वाले दूध (low-fat milk) और उसके उत्पादों का सेवन अधिक लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा आप अपने डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह का पालन करें।

हाई बीपी में कॉफी का सेवन कैसा रहता है ?

वैसे तो हाई बीपी में कॉफी का सेवन डॉक्टरों के बीच विवाद का विषय रहा है, कुछ का कहना है कि कॉफी से बीपी में अचानक बढ़ोत्तरी हो जाती है, जबकि कुछ शोध कहते हैं कि अगर आप हाई बीपी होने से पहले से ही कॉफी का सेवन करते आए हैं तो आपके हाई बीपी पर कॉफी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और आगे चल कर हाई बीपी (High BP) के लक्षण नहीं दिखेंगे।

मेरी सलाह है कि अगर आपकी जाँच में आप हाई बीपी के मरीज पाए गए हैं, और आप पहले से कॉफी का सेवन नहीं करते हैं तो जाँच के बाद कॉफी का सेवन बीपी में बढ़ोत्तरी कर सकता है।

हाई बीपी में ग्रीन-टी का सेवन सेहत पर क्या प्रभाव डालता है?

मेरे हिसाब से और कई मेडिकल शोधों के अनुसार ग्रीन-टी को हाई बीपी में पीना अच्छा होता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि ग्रीन-टी में मौजूद पोषक तत्व सिस्टोलिक बीपी को 3.2 mmHg तक और डायस्टोलिक बीपी को 3.4 mmHg तक कम कर सकते हैं। बीपी को कम करने के इस काम को ग्रीन-टी केवल उन्हीं लोगों पर ही नहीं करती जो हाई बीपी से परेशान हों बल्कि यह प्रभाव उन लोगों पर भी पड़ता है जिन्हें हाई बीपी की समस्या नहीं है।

ग्रीन-टी के सेवन से न सिर्फ आपके हाई बीपी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि इसके नियमित सेवन से आपके दिल, आंत और कोलेस्ट्रॉल पर अच्छे प्रभावों के साथ-साथ धमनियों को भी आराम मिलेगा। इसके साथ आप समय समय पर अपना बीपी चेक करके सुनिश्चित कर लें की वो ठीक स्तर में ही रहता है।

कैसा होगा हाई बीपी में लहसुन का प्रयोग?

हाई बीपी में लहसुन का उपयोग बहुत ही अच्छा होता है। मैं बीपी के मरीजों को इसके सेवन की सलाह देता हूं। दरअसल लहसुन के सेवन से आप अपने सिस्टोलिक और डायस्टोलिक बीपी को नियंत्रित कर सामान्य स्तर पर ला सकते हैं। ऐसा संभव होता है लहसुन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण जो हमारे शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड (nitric oxide) के उत्पादन में बढ़ोत्तरी करते हैं।

नाइट्रिक ऑक्साइड हमारी मास-पेशियों को आराम देने के साथ-साथ धमनियों को फैलाने में मदद करता है जो हाई बीपी को कम करने में मदद करती हैं। रोजाना लगभग 600-900 मिलीग्राम लहसुन का सेवन बीपी में 9-12% की कमी कर देता है।

क्या हाई बीपी में आमला खाया जा सकता है?

मेरे हिसाब से हाई बीपी में आंवले का सेवन बेहद गुणकारी साबित हो सकता है। आंवला एक आयुर्वेदिक दवा के रूप में देखा जाता है, इसमें विटामिन सी मौजूद होता है और विटामिन सी, रक्त कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने और रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने में मदद करता है। प्रेगनेंसी में भी आमला खाना बहुत अच्छा माना जाता है इसलिए प्रेगनेंसी में हाइपरटेंशन या हाई बीपी में भी महिलाओं को आमला खाने की सलाह दी जाती है।

मैं, आपको रोज सुबह खाली पेट आंवले का जूस पीने की सलाह देता हूँ, क्योंकि यह हाई बीपी और अन्य बीमारियों में भी फायदा पहुँचाता है।

अंडे का सेवन हाई बीपी में लाभ देगा या हानि?

अगर आप हाई बीपी से परेशान हैं और सोच रहे हैं कि नाश्ते में क्या खाया जाए तो आपके लिए अंडा एक अच्छा विकल्प है। अध्ययनों से पता चला है कि अंडे में मौजूद प्रोटीन्स कुछ जरूरी रसायनों का उत्पादन करते हैं। इन रसायनों को पेप्टाइड्स (peptides) के रूप में जाना जाता है। ये पेप्टाइड्स हाई बीपी की दवा के रूप में काम करते हैं।

इसके अलावा अंडे की जर्दी की अगर बात की जाए तो इसमें मौजूद यौगिक जठरांत्रिय (gastrointestinal) को नुकसान से बचाते हैं, शरीर की रोग-प्रतिरक्षा क्षमता में बढ़ोत्तरी करते हैं और साथ ही आँखों के लिए भी लाभकारी होते है।

हाई बीपी अंतर्निहित बीमारियों की श्रेणी में आने वाली एक बीमारी है। यदि आप किसी अन्य बीमारी जैसे किडनी की बीमारी या दिल की बीमारी से जूझ रहें हैं तो उसके उचित इलाज के लिए आपको हाई बीपी को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है।

कई बार अंतर्निहित बीमारियों के कारण स्थिति जानलेवा स्तर पर पहुँच जाती है। ऐसे में जरूरी है कि आपको अपनी सभी समस्याओं की पूरी तरह से जानकारी हो ताकि समय रहते आप उसकी रोकथाम के लिए उचित कदम उठा सकें।

उपरोक्त लिखित इस लेख का उद्देश्य हाई बीपी के मरीजों को खान-पान के प्रति जागरुक करना है। बताए गए सभी नुस्खे केवल हाई बीपी की रोकथाम के लिए कारगर हैं। समस्या के पूर्ण समाधान के लिए आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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